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Late Vipin Tripathi :

23 फरवरी 1945 में अल्मोड़ा जिले के द्धाराहाट के दौला गांव में जन्मे स्व. विपिन त्रिपाठी जी पृथक राज्य आन्दोलनके अकेले ऐसे ब्लाक प्रमुख रहे है जिनके द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार को उत्तराखण्ड विरोधी नीतियों के खिलाफ दिये गये त्यागपत्र को सरकार ने स्वीकार कर लिया था। उक्रांद के अध्यक्ष रहे स्व. विपिन त्रिपाठी जी उत्तराखण्ड के उन गिने- चुने नेताओं में रहे है जिन्होने 35वर्ष के अपने राजनीतिक जीवनक में हमेशा शोषितों, पीड़ितों व आम जनता के लिए निरंतर कार्य किया। विषम से विषम परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य से कभी नही भटकने वाले स्व. …त्रिपाठी जी नैतिक व चारित्रिक मूल्यों तथा स्पष्ट राजनीतिक विचारधारा के धनी थे। अपने जीवन काल में उत्तराखण्ड के जनता के कल्याण के लिए रात – दिन एक कर उन्होनं उत्तराखण्ड राज्य के सपने को साकार करने में जीवन लगा दिया । समाचार जगत में आपकों उक्रांद का ‘ थिंक टैंक’ के रूप में जाना जाता था।

अल्मोंड़ा जनपद के द्वारहाट विकास खण्ड में दैरी गांव में स्व. त्रिपाठी का जन्म 1945 में हुआ। पिताजी स्व. मथुरा दत्त त्रिपाठी मुक्तेश्वर में डाक विभाग में कार्यरत थे। स्नातक तक कि शिक्षा प्राप्त करने बाद से ही त्रिपाठी का जीवन निरंतर जन आन्दोलनों एंव उत्तराखण्ड की जनता के जन जनसंघर्षो से भरा रहा। 1969 में डा. राममनोहर लोहिया, आचार्य नरेन्द्र देव, जय प्रकाश नारायण के विचारों से प्रेरणा लेकर प्रारम्भ किया। 1968 में हल्द्वानी से चु जन मशाल पाक्षिक पत्रिका का सम्पादन किया। 1971 से 1975के अपातकाल तक द्वारहाट से द्रोणाचल पहरी समाचार पत्र का प्रकाशन कर आपने शोषण और उत्पीड़न के खिलाफ अनेक लड़ाईयां लडीं। 1975 के आपातकाल में पूरे उत्तर प्रदेश में उन्हें सर्वाधिक दो वर्ष का सश्रम कारावास की सजा सुनाई गयी। वन संरक्षण के खिलाफ चले आंदोलन में उन्हें जेल जाना पडा। भूमिहीनों को जमीन दिलाने की लड़ाई से लेकर पहाड़ को नशे व जंगलों को वन माफियाओं से बचाने के लिए ये हमेशा संघर्ष करते रहे। 1970 में तत्कालीन मुख्यमंत्री चन्द्रभानु गुप्ता का घेराव करते हुए ये पहली बार पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गये। आपातकाल मे 24 जुलाई 1974 को प्रंस एक्ट की विभिन्न धाराओं के अन्तर्गत इनकी प्रेस व ‘द्रोणांचल प्रहरी’ सील कर शासन ने इन्हे गिरफ्तार कर अलमोड़ा के जेल भेज दिया। अल्मोड़ा, बरेली, आगरा, तथा लखनऊ जेल में दो वर्ष बिताने के बाद 22 अप्रैल 1976 को विपिन …त्रिपाठी को रिहा कर दिया गया। द्वारहाट में डिग्री कालेज, पोलोटेक्निक व इंजीनियरिंग कालेज खुलवाने हेतु भी इन्होने संघर्ष किया।1983-84 में शराब विरोधी आन्दोलन का नेतृत्व करते हुए पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

मार्च 1989 में बन अधिनियम का विरोध करते हुए विकास कार्यो में बाधक पेड़ काटने के आरोध में भी गिरफ्तार होने पर इन्हें 40 दिन जेल काटनी पड़ी। उत्तरांचल की पहली विधानसभा के लिए आप द्वारहाट चौखुटिया विधानसभा सीट से विधायक चुने गये। उनकी ईमानदारी को विकास के प्रति स्वच्छ स्पष्ट छवि एंव स्पष्ट वक्ता के रूप में अपनी अलग पहचान रखने वाले स्व. विपिन त्रिपाठी जी जी को योग्य विधायकों में गिना जाता है । उक्रांद के शीर्ष पदों पर रहने के बाद आपकी अध्यक्षता में उक्रांद आपकी दिखाये राह पर चलता रहे।


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