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Kashi Singh Airy :

काशी सिंह ऐरी जी उक्रांद के शीर्ष नेता है। पहाड़ की राजनीति में एक ध्रुव बन गये श्री ऐरी जी ने जब से दल का नेतृत्व संभाला, दल को पहाड़ में एक नई पहचान मिली।‌ श्री ऐरी जी पहाड़ के उन नेताओं मे रहे हैं जिन्होने युवावस्था में ही राजनीति को एक नई धारा प्रदान की। 1984 में वह पहली बार जब उत्तर प्रदेश की …विधानसभा के लिए चुने गए तो उत्तराखण्ड के भावी नेता के रूप मे लागों ने उन्हें स्वीकार किया। उक्रांद ने बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी श्री ऐरी जी को 1987 में अपना नेतृत्व में आंदोलन ने जो तीखे तेवर दिखाये उसी का परिणाम था वह राज्य आंदोलन के पर्याचवाची बन गये। श्री ऐरी जी पहाड़ की उन गिनी चुनी प्रतिभाओं में है जो प्रत्येक क्षेत्र में चमकते सितारे के रूप में अपनी पहचान बनाए रखते हैं। अपने छात्र जीवन में एक मेधावी छात्र कके रूप में वह शिक्षकों और छात्रों के प्रिय रहे। जूनियर हाई स्कूल, हाई स्कूल और इंटर मीडियेट की परिक्षा में वह प्रदेश की श्रेष्ठता सूची में रहे। विश्वविद्यालय की शिक्षा में भी वह श्रेष्ठता सूची में आते रहे। बी एस सी और एम एस सी में भी उनका श्रेष्ठता सूची में नाम था। श्री ऐरी जी ने अर्थशास्त्र में एम ए और एल एल बी भी किया श्री ऐरी जी ने सेना में कमीशन के लिए सी डी एस ई की परिक्षा भी पास की।

ऐरी जी छात्र जीवन से ही संधर्षशाल रहे है । वह पिथरागढ़ महाविद्यालय में उपाध्यक्ष रहे। विभिन्न छात्र आंदोलनों मे हिस्सा लेकर 1981 में उक्रांद में शामिल हो गए। 1985 में डीडीहाट सीट से पहली बार उत्तर प्रदेश की विधानसभा में पहुंचे। वह 1985, 1989, 1993 में विधायक रहे। 2001 में वह कनालीछीना से उतरांचल की पहली विधानसभा के लिए चुने गये। लंबा संसदीय अनुभव रखने वाले श्री ऐरी को अविभाजित उत्तर प्रदेश में प्रखर विधायक के रूप में जाना जाता था। प्रदेश में प्रखर विधान सभा में उन्होंने ऐतिहासिक काम किया एक बार 72 सवाल कर श्री ऐरी ने विधानसभा की नियमावली में परिवर्तन करवा दिया। विधानसभा को अपना कानून बनाना पड़ा कि एक समय में एक सदस्य सिर्फ 7 ही सवाल कर सकता है। श्री ऐरी जी ने 1987 मे जब दल का नेतृत्व सभांला तो उनके नेतृत्व में उक्रांद तेजी के साथ उभरा। उनके नेतृत्व में 27 नवम्बर 1987 को राजधानी दिल्ली में ऐतिहासिक रैली हुई 24, 36, 72,घंटों के सफल बंद हुए । 13 जनवम्बर 1986 तथा 6 मार्च व 23 अगस्त 1987 को आपके नेतृत्व में नैनीताल , पौड़ी और दिल्ली में जोरदार प्रदर्शन हुए थै 23 …सितंबर 1989 का आपके ही नेतृत्व में नैनीताल कमिश्नरी का घेराव भी हुआ। विधान सभा के सदस्य रहते हुए जन समस्याओं की और सरकार का ध्यान आकृष्ट करने के लिए आप लगातार उ प्र विधानसभा में आवाज उठाते रहे। उत्तराखण्ड राज्य के लिए जनजागृति पैदा करने हेतु 15 दिसंबर 1990 से शुरू हुए क्रांति मार्च का नेतृत्व करते हुए पुलिस ने आपको टिहरी में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

29 अगस्त 1994 को उत्तराखण्ड संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक चुने जाने के बाद इनके नेतृत्व में पृथक राज्य के ऐतिहासिक आंदोलन की शुरूआत हुई । 25 अगस्त 1994 को अपने 5 साथियों के साथ नैनीताल में आमरण अनशन पर बैठे। श्री ऐरी जी ने प्रदेश सरकार के उत्तराखण्ड विरोधी रवैये से शुब्ध होकर अनशन की स्थिति में ही लखनऊ आकर उ प्र विधानसभा से इस्तीफा …दे दिया। जो तकनीकी कारणों से स्वीकृत नहीं हुआ। आज वर्तमान में उत्तराखण्ड क्रांति दल के अध्यक्ष है।


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